- सिंहस्थ के लिए पुलिस को तैयार कर रहा प्रशासन: उज्जैन में पुलिस अफसरों की 21 दिन की खास ट्रेनिंग शुरू, 41 विषयों पर रहेगा फोकस; 117 अधिकारी बनेंगे “मास्टर ट्रेनर”
- उज्जैन में भस्म आरती में शामिल हुए बिहार के पूर्व डिप्टी CM विजय सिन्हा: नंदी हॉल में बैठकर किए दर्शन, महाकाल से मांगा आशीर्वाद
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू से सजे बाबा, गूंजी ‘जय श्री महाकाल’
- उज्जैन में तपिश का प्रकोप: 40-41°C पर अटका पारा, अगले 4 दिन में और बढ़ेगी गर्मी; स्वास्थ्य विभाग सतर्क, हीट मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार
- सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर सख्ती: मुख्य सचिव ने कहा—समय से पहले पूरे हों काम, बारिश से पहले बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करें; मेडिसिटी, सड़क और पुल निर्माण की भी समीक्षा की
टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज़ शिखर धवन ने किए महाकाल के दर्शन, बोले – “यहां आकर अद्भुत शक्ति का अनुभव होता है”
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
रविवार सुबह उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक खास नज़ारा देखने को मिला। टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर शिखर धवन बाबा महाकाल के दरबार में पहुंचे और भस्म आरती में शामिल होकर भगवान शिव की भक्ति में पूरी तरह लीन हो गए।
नंदी हॉल में बैठकर धवन ने पूरे श्रद्धा भाव से आरती और पूजा-अर्चना की। आरती के दौरान उन्होंने आंखें बंद कर ध्यान लगाया और हाथ जोड़कर भगवान महाकाल से आशीर्वाद मांगा। आरती समाप्त होने के बाद उन्होंने कहा –
“महाकाल के दरबार में आकर जो शक्ति और शांति महसूस होती है, वह शब्दों में बयान नहीं की जा सकती। यहां आकर आत्मा को सुकून और ऊर्जा दोनों मिलते हैं।”
दूसरी बार पहुंचे बाबा के दरबार में
दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए शिखर धवन ने बताया कि यह उनका दूसरा दौरा है। उन्होंने कहा कि महाकाल की नगरी उज्जैन का आध्यात्मिक माहौल हर व्यक्ति को अपनी ओर खींच लेता है।
“यहां आकर हर कोई भक्ति में खो जाता है। मुझे लगता है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद हमेशा हमारे जीवन में बना रहना चाहिए,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
मंदिर समिति ने किया सम्मान
दर्शन-पूजन के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया ने शिखर धवन का स्वागत किया। उन्हें भगवान महाकाल का दुपट्टा, प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
धवन ने कहा कि भस्म आरती का अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। मंदिर के पारंपरिक ढोल-शंख की गूंज और रुद्राभिषेक के मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने कुछ देर ध्यान भी लगाया। उन्होंने बताया कि जब भी मौका मिलेगा, वे फिर से महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आएंगे।